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सत्यार्थप्रकाश

स्वामी दयानन्द सरस्वती

Book Pages : 486
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सत्यार्थप्रकाश

स्वामी दयानन्द सरस्वती

  • 4.9
  • Last Update 9 months ago
  • Book Description

    सत्यार्थ प्रकाश की रचना आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती ने की। यद्यपि उनकी मातृभाषा गुजराती थी और संस्कृत का इतना ज्ञान था कि संस्कृत में धाराप्रवाह बोल लेते थे, तथापि इस ग्रन्थ को उन्होंने हिन्दी में रचा। कहते हैं कि जब स्वामी जी 1872 में कलकत्ता में केशवचन्द्र सेन से मिले तो उन्होंने स्वामी जी को यह सलाह दी कि आप संस्कृत छोड़कर हिन्दी बोलना आरम्भ कर दें तो भारत का असीम कल्याण हो। तभी से स्वामी जी के व्याख्यानों की भाषा हिन्दी हो गयी और शायद इसी कारण स्वामी जी ने सत्यार्थ प्रकाश की भाषा भी हिन्दी ही रखी।

  • Book Details

    Title : सत्यार्थप्रकाश


    Sub Title : N/A


    Series Title : N/A


    Language : Hindi


    Category : Book


    Subject : हिन्दू धर्म एवं अन्य मत-पंथों का तुलनात्मक अध्ययन


    Author 1 : स्वामी दयानन्द सरस्वती


    Author 2 : N/A


    Translator : N/A


    Editor : N/A


    Commentator : N/A


    Publisher : Arsh Sahitya Prachar Trust


    Edition : 69


    Publish Year : 2008


    Publish City : Delhi


    ISBN # : N/A


    https://vediclibrary.in/book/12/satyarth_prakash

  • Book Index

    १- प्रथम समुल्लास में ईश्वर के ओंकाराऽऽदि नामों की व्याख्या।

    २- द्वितीय समुल्लास में सन्तानों की शिक्षा।

    ३- तृतीय समुल्लास में ब्रह्मचर्य, पठनपाठनव्यवस्था, सत्यासत्य ग्रन्थों के नाम और पढ़ने पढ़ाने की रीति।

    ४- चतुर्थ समुल्लास में विवाह और गृहाश्रम का व्यवहार।

    ५- पञ्चम समुल्लास में वानप्रस्थ और संन्यासाश्रम का विधि।

    ६- छठे समुल्लास में राजधर्म।

    ७- सप्तम समुल्लास में वेदेश्वर-विषय।

    ८- अष्टम समुल्लास में जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय।

    ९- नवम समुल्लास में विद्या, अविद्या, बन्ध और मोक्ष की व्याख्या।

    १०- दशवें समुल्लास में आचार, अनाचार और भक्ष्याभक्ष्य विषय।

    ११- एकादश समुल्लास में आर्य्यावर्त्तीय मत मतान्तर का खण्डन मण्डन विषय।

    १२- द्वादश समुल्लास में चारवाक, बौद्ध और जैनमत का विषय।

    १३- त्रयोदश समुल्लास में ईसाई मत का विषय।

    १४- चौदहवें समुल्लास में मुसलमानों के मत का विषय।